[PDF] दुर्गा अष्टमी व्रत कथा

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दुर्गा अष्टमी व्रत कथा | Durga Ashtami Vrat Katha Hindi PDF Summary

Today we are going to share दुर्गा अष्टमी व्रत कथा PDF / Durga Ashtami Vrat Katha PDF in Hindi with you. Durga Ashtami is one of the most popular festivals in India. There are many people who observe the Ashtami fast and end the fast of Navratri on this day. You can praise Goddess Durga by doing fast on this day and seek her blessings for you and your family. Goddess Durga is the most worshipped goddess in India. In this article, we have given the download link for नवरात्री अष्टमी व्रत कथा PDF | Navratri Ashtami Vrat Katha PDF

If you also want to seek the blessings of Goddess Durga by observing the fast of Durga Ashtami. There are few things you should remember while observing this fast. You should recite the Durga Ashtami Vrat Katha for the completion of your fast.

दुर्गा अष्टमी व्रत कथा PDF | Durga Ashtami Vrat Katha PDF

पौराणिक कथा के अनुसार मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन के लिए मान्यता है कि दुर्गम नाम के क्रूर राक्षस ने अपनी क्रूरता से तीनों लोकों को पर अत्याचार किया हुआ था। उसके आतंक के कारण सभी देवता स्वर्ग छोड़कर कैलाश चले गए थे। दुर्गम राक्षस को वरदान था कि कोई भी देवता उसका वध नहीं कर सकता, सभी देवता ने भगवान शिव से विनती कि वो इस परेशानी का हल निकालें। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्तियों को मिलाकर शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन देवी दुर्गा को जन्म दिया। इसके बाद माता दुर्गा को सबसे शक्तिशाली हथियार दिया गया और राक्षस दुर्गम के साथ युद्ध छेड़ दिया गया। जिसमें माता ने राक्षस का वध कर दिया और इसके बाद से दुर्गा अष्टमी की उत्पति हुई। इसलिए दुर्गा अष्टमी के दिन शस्त्र पूजा का भी विधान है।

अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त | Durga Puja Muhurat 2021

दुर्गा अष्टमी बुधवार, अक्टूबर 13, 2021 को

अष्टमी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 12, 2021 को 09:47 पी एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त – अक्टूबर 13, 2021 को 08:07 पी एम बजे

अष्टमी कन्या पूजन शुभ मुहूर्त

नवरात्रि अष्टमी शुभ मुहूर्त: अमृत काल- 03:23 AM से 04:56 AM तक और ब्रह्म मुहूर्त– 04:41 AM से 05:31 AM तक है।

कैसे करें कन्या पूजन ?

कन्या पूजन कोई घर पर तो कोई मंदिर में जाकर करता है।

शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को कंजक पूजा के लिए आमंत्रित करना चाहिए।

कन्या पूजन में एक बालक का होना भी जरूरी माना जाता है।

कन्या पूजन वाले दिन सबसे पहले माता अम्बे की विधि विधान पूजा कर लें।

इसके बाद कन्याओं और बालक के साफ जल से पैर धोएं।

फिर कन्याओं और बालक को विराजने के लिए आसन दें।

फिर मां दुर्गा के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और सभी कन्याओं और एक बालक को तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें।

इसके बाद बालक और कन्याओं को भोजन परोसें।

भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।

फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें सम्मान के साथ विदा करें।

अष्टमी दिन का चौघड़िया मुहूर्त

लाभ – 06:26 AM से 07:53 PM
अमृत – 07:53 AM से 09:20 PM
शुभ – 10:46 AM से 12:13 PM
लाभ – 16:32 AM से 17:59 PM

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नवरात्री अष्टमी व्रत कथा PDF | Navratri Ashtami Vrat Katha PDF

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